एमिटी विश्वविद्यालय में ‘कैंसर एंव कैंसर इम्यूनोथेरेपी में प्रगति’ पर अंर्तराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ
छात्रों और शोधार्थियों को कैंसर इम्यूनोथेरेपी के क्षेत्र मे हो रही अनुसंधानिक प्रगति की जानकारी प्रदान करने के लिए एमिटी विश्वविद्यालय के एमिटी सेंटर फॉर ट्रांसलेशनल रिसर्च द्वारा ग्लोबल कैंसर कंसोरियम के सहयोग से 5वें अंर्तराष्ट्रीय ग्लोबल कैंसर कंसोरियम सम्मेलन का आयोजन किया गया। 29 से 31 जनवरी तक चलने वाले इस सम्मेलन का शुभारंभ भारत सरकार के स्वास्थय अनुसंधान विभाग के सचिव एंव भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डा राजीव बहल, एमिटी शिक्षण समूह के संस्थापक अध्यक्ष डा अशोक कुमार चौहान, तलवार फांउडेशन के संस्थापक डा जी पी तलवार, इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी के उपाध्यक्ष डा एन के मेहरा, एमिटी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर डा बलविंदर शुक्ला, एम्स के पूर्व चिकित्सक डा जी के रथ, एमिटी सांइस टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन फांउडेशन के अध्यक्ष डा डब्लू सेल्वामूर्ती और ग्लोबल कैसर कंसोरियम के संस्थापक डा विवेक एम रंगनेकर द्वारा किया गया।

सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए भारत सरकार के स्वास्थय अनुसंधान विभाग के सचिव एंव भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डा राजीव बहल ने कहा कि इस सम्मेलन का आयोजन अत्यंत महत्वपूर्ण समय में हो रहा है। वैश्विक स्तर पर कर्क रोगीयों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है जिसका कारण खराब जीवनशैली, प्रदूषण आदि है। इम्यूनोथेरेपी न केवल आशा प्रदान करती है बल्कि वास्तव में कैंसर की देखभाल में 25 प्रतिशत तक सहायक रही है, हालांकि, भारत में कैंसर के उपचार में अभी भी बहुत काम किया जाना बाकी है। हमें इसके महत्व की जानकारी है इसके लिए राष्ट्रीय और अंर्तराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना होगा जिससे उत्पाद (औषधी, उपचार और निदान) को किफायती एवं उपलब्धता सुलभ बनाया जा सके। कैंसर रोगियों को किफायती उपचार उपलब्ध कराया जाना चाहिए जो उच्च गुणवत्ता वाला भी हो। इसके अलावा, शिक्षाविदों और उद्योग के बीच अनुसंधान और विकास सहयोग की आवश्यकता है ताकि नई तकनीकें और उपचार विकसित किए जा सकें।

एमिटी शिक्षण समूह के संस्थापक अध्यक्ष डा अशोक कुमार चौहान ने कहा कि आज दिन एक ऐतिहासिक दिन है जब देश विदेश के कैसर इम्यूनोथिरेपी के क्षेत्र में कार्य कर रहे विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, शोधार्थी आदि एमिटी के इस सम्मेलन मे उपस्थित है और कर्क रोग जैसे जटिल रोग के उपचार पर मंत्रणा कर रहे है। इस क्षेत्र में अनुसंधान कार्य के बृहद अवसर उपलब्ध है। हमें विभिन्न प्रयोगों के माध्यम से इस क्षेत्र में आ रही चुनौतियों के निवारण हेतु कार्य करना होगा और एमिटी, राष्ट्र निर्माण में सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।

तलवार फांउडेशन के संस्थापक डा जी पी तलवार ने कहा कि उन्नत चरण के ड्रग-प्रतिरोधी टर्मिनल कैंसर के उपचार के लिए इम्यूनो-थेरेप्यूटिक दृष्टिकोणों का विकास आवश्यक है क्योंकि इम्यूनोथेरेपी कैंसर कोशिकाओं पर हमला करने के लिए जन्मजात और अनुकूली प्रतिरक्षा प्रणाली का उपयोग करने का प्रयास करती है। इम्यूनोथेरेपी प्रतिरक्षा प्रणाली के काम करने के तरीके को बढ़ा या बदल सकती है ताकि यह कैंसर कोशिकाओं को ढूंढ सके और उन पर हमला कर सके, इसलिए, कैंसर की रोकथाम में इम्यूनोथेरेपी को एक प्रमुख क्षेत्र होना चाहिए।
एमिटी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर डा बलविंदर शुक्ला ने कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान और विकास प्रयोगशालाओं और अस्पतालों के साथ समान सहयोग स्थापित करना है, ताकि कैंसर के खिलाफ नई दवाओं को मान्य करने के लिए महत्वपूर्ण अनुवादात्मक और नैदानिक अध्ययन किए जा सकें। समुदाय में कैंसर के प्रभावी नियंत्रण के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यवहार्य कैंसर निर्देशित प्रतिरक्षा चिकित्सा विकसित करने के लिए विभिन्न तौर-तरीकों पर चर्चा करना है
इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी के उपाध्यक्ष डा एन के मेहरा ने कहा कि भारत में कैंसर के मामलों की संख्या 2022 में 1.46 मिलियन से बढ़कर 2025 में 1.57 मिलियन होने की संभावना है। इम्यूनोथेरेपी रोग की रोकथाम या उपचार में ऐसे पदार्थों की मदद से मदद करती है जो प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को उत्तेजित करते हैं। इसलिए, रोग से लड़ने के लिए इम्यूनोथेरेपी विकसित करना महत्वपूर्ण है। वियना ष्इम्यूनोलॉजी का मक्काष् है और इस साल वियना में कैंसर पर एक बहुत ही महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित होने वाला है, जिसमें शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों को भाग लेना चाहिए, ताकि वे नई अवधारणाओं, उपचारों और उपचारों को सोच सकें और नयापन ला सकें।
एम्स के पूर्व चिकित्सक डा जी के रथ ने कहा कि कैंसर भारत में सबसे घातक बीमारी है, जिसने हृदयाघात को भी पीछे छोड़ दिया है, हालांकि, अगर शुरुआती चरण में पता चल जाए तो 60 प्रतिशत कैंसर का इलाज संभव है। पंजाब राज्य में कोई मौखिक कैंसर नहीं है, जो सराहनीय है, हालांकि, भारत के कई राज्यों में कैंसर के रोगियों की संख्या बहुत अधिक है। समय की मांग है कि कैंसर के उपचार में नई चिकित्सा और उनके रणनीतिक कार्यान्वयन पर अधिक ध्यान दिया जाए।
एमिटी सांइस टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन फांउडेशन के अध्यक्ष डा डब्लू सेल्वामूर्ती ने कहा कि सम्मेलन में कैंसर निर्देशित हस्तक्षेपों के विकास के लिए स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के उत्थान के लिए वर्तमान में उपलब्ध विभिन्न तौर-तरीकों पर चर्चा की जाएगी। सम्मेलन चिकित्सकों और वैज्ञानिकों को कैंसर के खिलाफ नई प्रतिरक्षा-फार्मास्यूटिकल्स डिजाइन करने में अपने विचारों और अनुभवों को साझा करने के लिए एक मंच प्रदान करेगा, जिससे संभावित रूप से विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं के बीच सहयोग भी हो सकता है।
ग्लोबल कैसर कंसोरियम के संस्थापक डा विवेक एम रंगनेकर और एमिटी विश्वविद्यालय के हैल्थ एंड एलाइड सांइसेस के डीन डा बी सी दास ने अतिथियों का स्वागत किया। उद्घाटन सत्र में अतिथियों द्वारा सम्मेलन आधारित पुस्तक का विमोचन किया गया। तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान, “ट्यूमर माइक्रोएनवायरनमेंट और इम्युनिटी”, उभरती कैंसर इम्यूनोथेरेपी”, “ड्रग रेजिस्टेंस और कैंसर थेरेपी”, “कैंसर बायोमार्कर और वैक्सीन” और “कैंसर लक्षित थेरेपी” जैसे विषयों पर तकनीकी सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। सम्मेलन में लगभग 80 विशेषज्ञ ऑफलाइन और ऑनलाइन उपस्थित होकर अपने विचार रखेगे जिसमें 60 भारत के और 20 विभिन्न देशों के होगें।


