केदारनाथ : आप भी घर बैठे 360 डिग्री व्यू में आदिगुरु शंकराचार्य के करें दर्शन
प्रधानमंत्री मोदी केदारनाथ में आदिगुरु शंकराचार्य की समाधि एवं प्रतिमा का करेंगे लोकार्पण
आज से साढ़े बारह सौ वर्ष पूर्व केरल के कालड़ी ग्राम में 788 ई॰ में भगवान् शंकर की कृपा से बालक शंकराचार्य का जन्म हुआ। शंकराचार्य ने संपूर्ण हिन्दू समाज को एकता के सूत्र में पिरोने का काम किया।
आदिगुरु शंकराचार्य का जीवन धर्म और आस्था के प्रति समर्पण का भाव दर्शाता है। इन्होंने भारतवर्ष में चार कोनों में चार मठों की स्थापना की थी जो अभी तक बहुत प्रसिद्ध और पवित्र माने जाते हैं ! शंकराचार्य ने आठ वर्ष की आयु में चारों वेदों में निष्णात हो गए, बारह वर्ष की आयु में सभी शास्त्रों में पारंगत, सोलह वर्ष की आयु में शांकरभाष्य तथा केदारनाथ में बत्तीस वर्ष की आयु में पंचतत्त्व में विलीन हो गये ।
शंकराचार्य ने कश्मीर से लैकर कन्याकुमारी, अटक से लेकर कटक तक भारतवर्ष की यात्रा करते हुए विद्वानों से शास्त्रार्थ किया । वैदिक धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए विशाल सेना बनायी । लोगों को वैदिक धर्म के सच्चे और पवित्र रूप से अवगत कराया ।
सिक्स सिग्मा केदार के निदेशक डा. प्रदीप भारद्वाज ने बताया कि भगवान भोले शंकर के साक्षात अवतार आदिगुरु शंकराचार्य केरल राज्य के कलादि ग्राम में एक ब्राह्मण परिवार में अर्याम्बा और शिवागुरु के पुत्र के रुप में जन्में थे। उनके जन्म से जुड़ी एक प्रचलित कथा के मुताबिक उनके माता-पिता दोनो निसंतान थे, जिन्हें शादी के कई सालों बाद भी संतान की प्राप्ति नहीं हो रही थी, जिसके बाद उनकी माता-पिता ने संतान प्राप्ति के लिए भगवान शिव की कठोर तपस्या की।
इसके बाद भगवान शिव ने प्रसन्न होकर उन्हें पुत्रवर दिया, हालांकि इसके लिए उन्होंने शर्त रखी। शर्त के मुताबिक उन्होंने सपने में कहा कि ”तुम्हारे यहां जन्म लेने वाला दीर्घायु पुत्र सर्वज्ञ नहीं होगा और सर्वज्ञ पुत्र अल्पआयु होगा” जिसके बाद आदि शंकाराचार्य जी के माता-पिता ने सर्वज्ञानी पुत्र की मांग की। आदिगुरु शंकराचार्य जी ने समस्त भारतवर्ष का भ्रमण कर पूरे देश में हिन्दू धर्म का जमकर प्रचार-प्रसार किया। उन्होंने गोर्वधन मठ, वेदान्त मठ, ज्योतिमठ एवं शारदा मठ की स्थापना कर देश को हिन्दू धर्म, संस्कृति और दर्शन की झलक दिखाई एवं उन्होंने भारत देश में चारों तरफ हिन्दुओं का परचम लहराया।


