अमरोहा का चौहान मॉडल पर्यावरण संरक्षण एक प्रयास

अमरोहा का चौहान मॉडल पर्यावरण संरक्षण एक प्रयास

10 जून 2019 की सुबह एक राष्ट्रीय न्यूज़ चैनल पर  खबर चल रही थी कि दिल्ली के पालम हवाई अड्डे   का तापमान 50 डिग्री सेंटीग्रेड के आसपास होने की आशंका है खबर ने फ़्लैश बैक में पहुंचा दिया। अपने गांव में गुजारे हुए दिनों की याद आने लगी। वह सब परिस्थितियां दिमागी पर्दे पर चलचित्र की भांति दौड़ने लगी जो गर्मियों के दिनों में दृष्टिगोचर होती थी। जब गांव में खेतों में बढ़े तापमान के कारण दिन के 12:बजे से शाम के 4: बजे तक अघोषित कर्फ्यू या यूं कहें तापमान की धारा 144 लागू हो जाया करती थी। उस समय खेतों में काम करने वाले किसान मजदूर अपने घरों में दुबक जाया करते थे या यूं कहें  सूर्य भगवान के द्वारा लागू की गई धारा 144 का अनुपालन बिना किसी पुलिस प्रशासन के अक्षरशः हुआ करता था। माएं अपने बच्चों को आगोश में लेकर लू से बचाती थी। ऐसा लगता है शायद उस समय तापमान 50 डिग्री न रहता हो। लेकिन आज सुनी खबर ने मन मस्तिष्क को  अवश्य प्रभावित कर दिया था। मन मस्तिष्क में ज्वालामुखी का लावा बहने लगा उसे देख कर  लोगों के  उत्पादन की क्षमता प्रभावित होने की आशंका बलवती होने लगी। मन भयभीत हुआ कि तापमान कर्फ्यू का कार्यकाल और बढ़ तो  नहीं जाएगा । आखिर तापमान कर्फ्यू कितना उत्पादन लीलेगा। गर्मी से बचाव के संसाधनों का खर्च बढ़ता चला जाएगा। इसी विचार को लेकर तहसील नौगावां सादात जनपद अमरोहा के कार्यालय में पहुंचा। लगभग 2: बजे का समय था । तहसील क्षेत्र के थाना नोगावाँ सादात से शांति भंग की आशंका में आपसी विवाद करने वाले दो व्यक्तियों को सीआरपीसी की धारा 151 के तहत मेरे समक्ष प्रस्तुत किया गया। उनसे पूछताछ करते समय उन्हें आपस में झगड़ा करते देख मन में विचार कौंधा कि तापमान तो इन व्यक्तियों का भी बढ़ा हुआ है । पृथ्वी के बढे तापमान और अभियुक्तों के बड़े तापमान को देखकर मन मस्तिष्क ने कहा कि पृथ्वी और व्यक्ति दोनों के तापमान को कम किए जाने की आवश्यकता है । व्यक्ति का तापमान रचनात्मक कार्य देकर और पृथ्वी का तापमान पेड़ पौधे लगाकर कम किया जा सकता है । ऐसा विचार मन में प्रस्फुटित हुआ । तभी आदरणीय जिलाधिकारी जनपद अमरोहा श्री उमेश कुमार मिश्र जी से सहमति और प्रोत्साहन पाकर अभियुक्तों से स्वयं के खर्च पर पांच-पांच पौधे और जमानती से स्वयं के खर्च पर एक एक पौधा लगाने की जिम्मेदारी दी गई। अभियुक्त एवं जमानती कार्यालय में रखे हुए रजिस्टर में हस्ताक्षर कर पेड़ लगाने की शपथ लेंगे और अग्रिम तारीख पर पौधा लगाते हुए फोटो दाखिल करेंगे। अभियुक्त एवं जमानती अपनी अपनी पसंद का फलदार अथवा छायादार पौधा अपने घर पशुशाला अथवा खेत में लगाएंगे । यदि इन स्थानों पर जगह नहीं है तो सरकारी भूमि रास्ते के किनारे अथवा राजस्व लेखपाल के  निर्देशित स्थान पर पौधा लगाएंगे। इस हेतु तहसील कार्यालय में रखे हुए पंजिका रजिस्टर में अपना मोबाइल नंबर भी अंकित करेंगे। जिससे समय-समय पर उनके द्वारा लगाए गए पौधों की अधावधिक स्थिति का पता लगाया जा सके । यह हरित जमानत का बंध पत्र तहसील नौगावां सादात की तैनाती के दौरान आरंभ किया गया जो आज भी जारी है। तहसील धनोरा में भी अपनी तैनाती के दौरान उक्त पर्यावरण हितैषी कार्य को आरंभ कराया । इस बात से प्रभावित होकर तहसील आने वाले व्यक्तियों द्वारा भी स्वयं के खर्चे पर वृक्षारोपण का पवित्र कार्य आरंभ किया गया । इस अभियान के तहत अभी तक लगभग बीस हजार से अधिक पौधों का रोपण बिना किसी सरकारी खर्च के जन सहयोग से किया गया है ।

स्टेप 2

शांति भंग की आशंका में पुलिस द्वारा गिरफ्तार अभियुक्त जो न्यायालय उप जिलाधिकारी मैं प्रस्तुत किए जाते हैं । उनसे हरित बंद पत्र, हरित शपथ के आधार पर स्वयं के खर्च पर पांच वृक्ष तथा उनके जमानती द्वारा एक एक वृक्ष लगाए जाने की सामाजिक जिम्मेदारी निभाए जाने का प्रचार प्रसार जैसे ही प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में हुआ तो क्षेत्र के अन्य लोग भी वृक्षारोपण के प्रति आकर्षित हुए । तहसील वासियों का योगदान प्राप्त करने के उद्देश्य से तहसील नौगावां सादात के कक्षों , वह सभागार की दीवारों को वृक्षारोपण एवं जल संरक्षण के नारों एवं चित्रों के द्वारा सज्जित कराया गया ‌। तहसील में हुई वॉल पेंटिंग से तहसील आने वाले लोग आकर्षित हुए । उन्होंने तहसील की दीवारों पर चित्रों के साथ सेल्फी लेते हुए सोशल मीडिया पर डालना शुरू किया तथा अपने गांव में पहुंचकर अन्य व्यक्तियों से भी चर्चा की । उक्त प्रचार प्रसार से प्रेरित होकर अन्य लोग भी वृक्षारोपण और जल संरक्षण के प्रति प्रेरित हुए । उनके द्वारा मेरे समक्ष उपस्थित होकर वृक्षारोपण करने एवं जल संरक्षण करने की इच्छा व्यक्त की गई । इस मुहिम से प्रेरित होकर गांव बस्ता पुर के निवासियों द्वारा  23 जून 2019 को 100 पेड़ लगाए गए । तथा इस दिन को प्रेरणा दिवस के रूप में मानते हुए प्रतिवर्ष 100 पर लगाने की शपथ ली । इस सर्व जन हितेषी मुहिम से उत्साहित होकर तहसील वासी मेरे कार्यालय में उपस्थित होकर वृक्षारोपण और जल संरक्षण की इच्छा व्यक्त करने लगे । इस हेतु उनके लिए कार्यालय में पंजिका पुस्तिका रखवायी गई जिसमें उनका नाम, पिता का नाम , निवास, एवं मोबाइल नंबर अंकित कर उनके द्वारा लगाए गए पेड़ों की संख्या अंकित कर वृक्षारोपण एवं जल  संरक्षण की शपथ सहित हस्ताक्षर /अंगूठा लगवाए गए । इस प्रकार तहसील क्षेत्र में 5000 से अधिक पेड़ लगे । जिस व्यक्ति के द्वारा 5 वृक्ष से अधिक पेड़ लगाने की शपथ ली गई, उसके यहां मेरे द्वारा स्वयं पहुंचकर वृक्षारोपण कराया गया ।  

स्टेप 3

सीआरपीसी की धारा 151 के तहत पुलिस द्वारा गिरफ़्तार कर उप जिलाधिकारी न्यायालय में प्रस्तुत किए गए अभियुक्तों एवं जमानती द्वारा वृक्षारोपण योजना से प्रभावित होकर तहसील निवासियों द्वारा भी वृक्षारोपण एवं जल संरक्षण कार्य में प्रतिभाग किया जाने लगा । लोगों का यह  प्रयास तहसील कार्यालय  पर वृक्षारोपण एवं जल संरक्षण के प्रचार प्रसार का माध्यम बन चुका था । इस बात से प्रभावित होकर मन में विचार आया कि क्यों न इसे ग्राम स्तर पर भी और अधिक प्रचारित किया जाए । जो समाज के लिए अपना अहम योगदान देना चाहते हैं । सामाजिक कार्यों में अपनी भागीदारी देना चाहते हैं उन्हें प्रेरित कर नेतृत्व दिए जाने की आवश्यकता है ।  समाज सेवा  में लगे व्यक्तियों का डाटा तैयार किया गया । तहसील नौगावां सादात में 1000 व्यक्तियों को जोड़ा गया तथा इन्हें पर्यावरण प्रहरी नाम दिया गया । सर्वप्रथम इन व्यक्तियों को स्वयं के खर्च पर पेड़ लगाने की सामाजिक जिम्मेदारी दी गई । फिर इन पर्यावरण प्रहरियों के माध्यम से वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण  जन जागरुकता अभियान चलाया गया । जिससे आम जनमानस में जनचेतना जागृत हुई और आम व्यक्ति भी वृक्षारोपण एवं जल संरक्षण के कार्य को गंभीरता से लेने लगा ।

स्टेप 4

वृक्षारोपण एवं जल संरक्षण का अभियान जैसे-जैसे जोर पकड़ने लगा । ग्राम स्तर पर तेजी से प्रचार प्रसार हुआ वृक्षारोपण एवं जल संरक्षण के लिए रैलियां और गोष्ठियां किए जाने की मांग की जाने लगी । इसी अभियान के तहत सबसे पहले रैली /गोष्टी तहसील नौगांवा सादात के खंड साल कला  गांव में आयोजित की गई ।
सबसे पहले ग्राम में स्थित गुरुद्वारा में विचार गोष्ठी आयोजित की गई । विचार गोष्ठी में ग्राम वासियों ने अपने विचार रखते हुए कहा कि जिस प्रकार से हैंडपंप के स्थान पर सब मार्सिबल का प्रयोग किया जा रहा है उससे पानी की अधिक बर्बादी हो रही है । जहां पहले कोई व्यक्ति हैंड पंप से बाल्टी में पानी निकाल कर नहाया करता था । या फिर पानी के संतुलित प्रयोग किए जाते थे । उसके स्थान पर सब मर्सिबल से नहाने कपड़े धोने ट्रैक्टर गाड़ी धोने पशुओं को नहलाने आदि में अत्यधिक पानी का दुरुपयोग होता है । जिसके द्वारा भूमिगत जल का अत्यधिक दोहन किया जा रहा है। और भूमिगत जल का स्तर दिन प्रतिदिन गिरता चला जा रहा है । अनावश्यक नालियों में पानी बहने से रास्ते खराब हो रहे हैं । विचार गोष्ठी में उपस्थित व्यक्तियों द्वारा यह फैसला लिया गया कि जो भी व्यक्ति पानी का अधिक मात्रा में दुरुपयोग करता है उसे टोका जाए और उसे तब तक बार-बार टोका जाए जब तक वह पानी का दुरुपयोग बंद ना कर दे । ग्राम वासियों और स्कूली बच्चों के साथ ट्रैक्टर पर लाउडस्पीकर लगाकर एक जन जागरूकता रैली निकाली गई । जिसकी अगले दिन से ही फीडबैक आनी शुरू हो गई लोगों ने पानी के दुरुपयोग पर स्वत ही अंकुश लगाना शुरू कर दिया । मीडिया कवरेज द्वारा जानकारी होने पर अन्य ग्राम वासियों द्वारा भी रैलियां निकाली गई । जिस से प्रभावित होकर कई स्कूल कॉलेज के प्रधानाचार्य एवं प्रबंधकों द्वारा भी भी अनुरोध किया गया कि छात्र  छात्राओं को वृक्षारोपण एवं जल संरक्षण के प्रति प्रेरित किया जाये । इसी क्रम में तहसील नौगावां सादात  क्षेत्र के ग्राम चकरासी के विद्यालय प्रबंधक द्वारा अवगत कराया गया कि हमारे बालिका विद्यालय मातेश्वरी कन्या विद्यापीठ में आसपास के 35 ग्रामों के छात्राएं शिक्षा रत हैं । उनके द्वारा वृक्षारोपण एवं जल संरक्षण पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया तथा यह निर्णय लिया गया कि विचार गोष्ठी के उपरांत अध्ययनरत लड़कियों को एक एक डायरी दिलाएंगे । यह लड़कियां अपने-अपने ग्रामों में पहुंचकर वृक्षारोपण एवं जल संरक्षण की ग्राम वासियों को जानकारी देंगी तथा उनका नाम पिता का नाम वह मोबाइल नंबर अंकित करेंगी ।

स्टेप 5

ग्रामीण स्तर पर भारत सरकार की राशन वितरण योजना प्रणाली के अंतर्गत सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेता की तैनाती ग्राम सभा के प्रस्ताव पर की जाती है । जिसको ग्राम सभा की 80% जनसंख्या/ उपभोक्ता की सेवा करने का मौका मिलता है । अर्थात ग्राम में 80% आबादी से विक्रेता का सीधा संबंध होता है । सरकारी राशन विक्रेता मैं समाहित विशेषता/जन सामान्य से जुड़ाव को देखकर मन में विचार आया कि क्यों न इन राशन विक्रेताओं को भी सामाजिक जिम्मेदारी सौंपी जाए । जिससे उन्हें भी अपने रोजगार के साथ यह गर्व हो कि वह भी सामाजिक परिदृश्य को बदलने में अपना अहम योगदान दे सकते हैं । इस पर तहसील नौगांवा सादात क्षेत्र के समस्त राशन विक्रेताओं के साथ सीधा संवाद किया गया । तथा उनके साथ वृक्षारोपण और जल संरक्षण विषय पर विचार मंथन किया गया । विचार मंथन के उपरांत यह निर्णय लिया गया कि प्रत्येक राशन विक्रेता अपने पास एक पंजिका रखेगा जिसे  वृक्षारोपण एवं जल संरक्षण  पंजिका कहा जाएगा । यह पंजिका प्रत्येक राशन विक्रेता द्वारा सामाजिक जिम्मेदारी मानते हुए स्वयं के खर्च पर खरीदी  जाएगी । राशन विक्रेता राशन लेने आने वाले उपभोक्ताओं को वृक्षारोपण एवं जल संरक्षण के महत्व को समझाएंगे तथा वृक्षारोपण एवं जल संरक्षण की शपथ दिलाने स्वरूप उनके हस्ताक्षर /अंगूठा लगवायेंगे । इस प्रकार से यह योजना तहसील नौगावां सादात एवं तहसील मंडी धनौरा में आरंभ की गई । इस मुहिम से पर्यावरण का तो सुधार हुआ ही इसी के साथ राशन विक्रेताओं एवं उपभोक्ताओं के संबंधों में भी गुणात्मक सुधार हुआ । राशन विक्रेताओं में भी राशन विक्रय नैतिक हुआ एवं तहसील स्तर पर शिकायतों में भी कमी आई ।

स्टेप 6

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 9 अगस्त को 22 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था जिसके अंतर्गत तहसील नौगावां सादात के सभी तहसील स्तरीय सभी विभागों को वृक्षारोपण हेतु अलग-अलग लक्ष्य दिया गया  । तहसील नौगांवा सादात को तीन लाख से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य दिया गया जिसके लिए ग्राम पंचायतों के माध्यम से युद्ध स्तर पर अभियान चलाकर गड्ढे खुदवाए गए । इतने वृक्षों की संख्या देखकर मन में विचार आया कि सरकारी स्तर पर बड़ी संख्या में पौधे लगाने के बाद इनको  बचाने व पालन पोषण में समस्या हो सकती हैं । अतएव क्यों न आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को देखकर इन पौधों के संरक्षण हेतु जन सामान्य को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाए और इनके संरक्षण की जिम्मेदारी ग्राम वासियों को सौंपी जाए । जनभागीदारी हेतु युक्ति सूझी कि ग्राम वासियों  एवम पर्यावरण प्रहरियों के साथ वृक्ष सुरक्षा बंधन मनाया जाए । जिससे ग्राम वासियों के निवास खेत के समीपस्थ लगे सरकारी पौधों के संरक्षण हेतु पांच पांच पौधों  की जिम्मेदारी सौंपी जाए । ग्राम कुड़ा माफी मैं बड़े पैमाने पर एसडीएम स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया गया और ग्राम वासियों से पर्यावरण संरक्षण हेतु प्रत्येक ग्राम वासी को पांच पांच पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी सौंपी गई । ग्राम वासियों ने मेरी अपील पर पांच पांच पौधों को रक्षा सूत्र बांधा और  उनके संरक्षण की जिम्मेदारी ली गई । ग्राम कुड़ा माफी के रहने वाले मजदूर श्रीपाल एवं रामकुमार द्वारा 700 पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी दी गई । जिससे अनेक ग्राम वासियों को भी प्रेरणा मिली और वृक्ष सुरक्षा बंधन योजना परवान चढ़ी।

स्टेप 7

तहसील नौगावां सादात से मंडी धनौरा स्थानांतरण होने के पश्चात पर्यावरण की मुहिम उसी सोच के साथ आगे आरंभ की गई  हमारे आज के प्रयास से कल सुधरेगा । पर्यावरण रक्षणार्थ वृक्षारोपण एवं जल संरक्षण हेतु जन जागरूकता बढ़ाने के लिए एक नवीन सोच के साथ एक और कदम बढ़ाया गया । इस कदम के साथ कार्यालय के प्रवेश द्वार पर एक शपथ  लिखवादी गई कि  " मैं वृक्षारोपण एवं जल संरक्षण करने हेतु एवं अन्य लोगों को इस कार्य के लिए प्रेरित करने की शपथ लेता हूं"

उस शपथ पत्र के नीचे एक हाथ निशान बनाया गया जिस पर हाथ रखकर शपथ लेना होता है । यह तय किया गया कि एसडीएम कार्यालय में प्रवेश करने से पूर्व   पर्यावरण संरक्षण की शपथ लेनी होगी । इस प्रकार तहसील आने वाले व्यक्तियों धरना देने वाले संगठनों द्वारा भी शपथ लेना आरंभ कर दिया गया । इस शपथ अभियान को तब अधिक प्रचार-प्रसार मिला जब क्षेत्रीय विधायक श्री राजीव तरारा द्वारा भी कार्यालय में उपस्थित होकर शपथ ली  गई।  

स्टेप 7 प्लस वन

जन सुनवाई के दौरान यह देखने में आया ग्रामीण क्षेत्रों के अनेक व्यक्ति यह शिकायत लेकर आये कि  उनके राशन कार्ड के यूनिट कम हो गये हैं । उनके द्वारा यह भी शिकायत की गई कि राशन डीलर एवं आपूर्ति विभाग के लोग  बार बार शिकायत करने के बावजूद भी उनकी समस्या का समाधान नहीं कर रहे हैं । इस तरह के शिकायत पत्र रोज रोज प्राप्त हो रहे थे । 

इस समस्या पर मंथन किया गया और विचारोंपरांत तहसील कार्यालय पर एक रजिस्टर रखवाया गया । शिकायतों को पेपर लैस कराने के द्रष्टिगत प्रार्थी गण की सूचना बिना प्रार्थना पत्र के रजिस्टर में अंकित की गई । साथ ही शिकायतकर्ता एवं  आपूर्ति विभाग के ऑपरेटर के बीच संपर्क विहीन व्यवस्था बनाने हेतु शाम तक जितने भी प्रकरण दर्ज होते थे । उनको वाट्सअप के माध्यम से ऑपरेटर के पास भेजा जाने लगा । तथा अगले दिन उनके निस्तारण का भी जवाब लिया जाने लगा  । अपनाई गई व्यवस्था से 13000 शिकायतों का पेपरलेस निस्तारण हुआ । इस प्रकार कम से कम 26 हजार कागज बचे । इस पहल से पेड़ों को भी जीवित रखने में अवश्य सफलता मिली और पर्यावरण सुधार हेतु भी योगदान हुआ ।

स्टेप सेवन प्लस टू

तहसील में आने वाले व्यक्ति प्रार्थना पत्र लेकर उपस्थित होते हैं कई बार उनका निस्तारण होने पर/ उनका मनमाफिक निस्तारण न होने अथवा गुणात्मक निस्तारण न होने पर कई स्तरों पर बार-बार प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करते हैं । जिससे उनके धन और समय की भी बर्बादी होती है और अधिक मात्रा में कागज की बर्बादी के साथ वृक्षों की भी हानि होती है । व्यक्ति का जो समय व धन देश की उत्पादकता में प्रयोग हो सकता है यह अनावश्यक रूप से अपनी शिकायत /समस्या को विभिन्न फ़ोरम में बताने में नष्ट होता है । साथ ही कागज का अत्यधिक प्रयोग  वृक्ष कटान को बढ़ावा देकर पर्यावरण को हानि पहुंचाता है ।
   
साथ ही अभी देखने में आया कई ग्रामीण ऐसे भी हैं जो अपनी शिकायत /समस्या संकोच वस अथवा धना भाव के कारण किसी कार्यालय में उपस्थित होकर रखने में असमर्थ रहते हैं ।
उपरोक्त परिस्थितियों में मेरे अंतःकरण में सार्थक प्रयास का विचार उत्पन्न हुआ ‌। विचार मंथन के उपरांत पर्यावरण एवं लोकहित में जन शिकायतों को पेपरलेस बनाने हेतु ग्राम प्रधान स्तर पर ग्राम पंचायत सदस्यों को भागीदार बनाने का निर्णय लिया गया । इस विचार को क्रियान्वित करने हेतु ग्राम प्रधानों एवं ग्राम पंचायत सदस्यों के साथ मीटिंग कर ग्राम स्तर पर " ग्राम पंचायत शिकायत पंजिका" रखे जाने का आदेश पारित किया गया । इस व्यवस्था के अंतर्गत ग्राम पंचायत शिकायत पंजिका ग्राम प्रधान के पास रखवायी गई । शिकायत पंजिका में शिकायत दर्ज कर शिकायतकर्ता  का हस्ताक्षर अंगूठा लगाते ही दर्ज शिकायत को प्रार्थना पत्र माने जाने की पद्धति अपनाई गई । जिससे प्रार्थना पत्र लिखे जाने की आवश्यकता नहीं पड़ी । इस प्रयास से लोगों के बहुमूल्य समय की भी बचत हुई और धन की भी बचत हुई । ग्राम पंचायत स्तर पर राजस्व/ विकास /आपूर्ति/ विद्युत/ पुलिस विभाग से संबंधित शिकायतों के निस्तारण की व्यवस्था कराई गई। तथा समस्या समाधान में समुचित सहयोग हेतु इन विभागों के  तहसील स्तरीय अधिकारियों कर्मचारियों की मीटिंग कराई गई ।

ग्राम पंचायत पंजिका में दर्ज शिकायतें वाट्सअप के माध्यम से ग्राम स्तरीय कर्मचारियों को भेजा गया । कर्मचारियों द्वारा उसी क्रम में समस्याओं के निस्तारण में योगदान किया गया । इस प्रकार समस्याओं के निस्तारण के साथ पेपरलेस होने से वृक्षों का कटान उसी अनुपात में कम होगा । और पर्यावरण सुधार में एक क़दम स्वत ही आगे बढ़ जायेगा