विभाजन कालीन भारत की साक्षी ग्रंथ के खंड 3 व 4 का दत्तात्रेय होसबोले द्वारा लोकार्पण
नोएडा। सेक्टर 12 स्थिति भाऊ राव देवरस विद्या मंदिर के सभागार में जागृति प्रकाशन द्वारा प्रकाशित और कृष्णा नंद सागर लिखित पुस्तक विभाजनकालीन भारत के साक्षी के खंड 3 और 4 का लोकार्पण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले द्वारा किया गया
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि कि विभाजन तो कई देशों का हुआ परंतु भारत विभाजन के समय जो अत्याचार हुआ वैसा कहीं और नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि विभाजन के समय हज़ारों हिन्दू महिलायों ने पद्ममनी का रूप धारण किया। उन्होंने बोला कि जिहादी मानसिकता के कारण विश्व में कई बार और कई जगह रक्तपात हुआ है। जिहादी मानसकिता अभी भी समाप्त नही हुआ है। उन्होंने बताया कि भारत में किसी प्रकार के धर्म का प्रचार करने की स्वतंत्रता है। परंतु जिस क्षेत्र में हिन्दू की संख्या कम हुआ है वहाँ भारतीय राष्ट्रीयता कम हुआ है। भारत तभी तक लोकतांत्रिक रहेगा जब तक ये हिन्दू बाहुल्य रहेगा।

लेखक कृष्णानंद सागर ने बताया कि ग्रंथ लिखने कि प्रेरणा स्वतंत्रता से पहले और ठीक बाद धार्मिक उन्मादियों से देश की रक्षा करने वाले महान विभूतियों से मिली। उन्होंने बताया कि उन्होंने ऐसे महानुभावों से साक्षात्कार लिया और उसी के अनुरूप अध्यायीकरण किया है। उन्होंने बताया विभाजन के समय मुस्लिम समाज ने हिन्दुयों के विरोध युद्ध की घोषणा की थी।
कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रदीप कुमार जोशी (पूर्व अध्यक्ष, संघ लोक सेवा आयोग) ने कहा कि बहुत सारी समस्याओं का विभाजन ही है। अगर विभाजन नहीं हुआ होता तो पाकिस्तान सीमा पर भारत को सेना रखने के लिए आर्थिक व्यय नहीं करना पड़ता और न ही हमारे हज़ारो सैनकों को बलिदान देना पड़ता।
कार्यक्रम के विशिष्ठ अतिथि विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने बोला ने डॉ भीम राव अम्बेडकर द्वारा महाराष्ट्र के सतारा के एक ग्राम में हिन्दू समाज का इस्लाम में धर्म परिवर्तन होने से रोक था। बाबा साहब ने एक्सचेंज ऑफ पापुलेशन का समर्थन किया था।


