3 जुलाई को ही बीनू शर्मा ने बना दिया था दिव्य दरवार लड़खड़ाने का पर्चा

3 जुलाई को ही बीनू शर्मा ने बना दिया था दिव्य दरवार लड़खड़ाने का पर्चा

नोएडा। ग्रेटर नोएडा के जैतपुर गांव में चल रही भागवत कथा के दौरान 12 जुलाई को लगे दिव्य दरबार में क्षेत्रीय मीडिया द्वारा भगदड़ एवं घायल की खबरें प्रकाशित की गई है जो पूर्णताः निराधार एवं झूठी है। भीषण गर्मी, भारी संख्या में श्रद्धालु, पंखे का न चलना, आयोजकों की दोषपूर्ण नीति के कारण, आचार्यश्री के आने के बाद अधिकांश लोग खड़े हो गये जिससे पंडाल में हवा का स्तर बहुत कम रह गया और वह दूषित भी हो गयी। गर्मी व घुटन से बीच पंडाल में बैठे लगभग सभी श्रद्धालु बीमार हो गए जिसमें करीब 80 से ज्यादा लोग बेहोश व चक्कर आने पर पंडाल में ही गिर पड़े।

इस पूरे मामले में चौंकाने वाला विषय है कि दिव्य दृष्टि के माध्यम से देखने वाले बाबा होने वाले इस हादसे को कैसे नहीं भांप पाए! यह प्रश्न तमाम श्रद्धालुओं को बेचौन जरूर करता है लेकिन इससे ज्यादा चौंकाने वाला तथ्य है कि इस तरह का कोई हादसा हो सकता है इसका एक पर्चा 3 जुलाई को नोएडा में रहने वाले सैक्टर10 अन्तर्यामी सत्संग भवन के संस्थापक पंडित बीनू शर्मा ने बनाकर सबसे पहले रात को 9 बज कर 6 पर विश्व गुरु को दिया और यही पर्चा सभी आयोजकों समेत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को भी पहुंचाया गया है। नोएडा पुलिस- प्रशासन व बागेश्वर धाम के संचालकों को उपलब्ध होने के बावजूद भी हादसा नहीं रुका। निश्चित रूप से बने इस विश्व रिकार्ड को आयोजकों की खामियों ने गंदा कर दिया है। पूरी दुनियां में इससे पहले किसी भी कथा में इतना जनसैलाब नहीं उमड़ा है।

क्या रही खामियां

बने इस विशालतम पंडाल में पंखे, कूलर एवं वेंटिलेशन का बेहद अभाव है जिसमें श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने पर दम घुटने जैसा माहौल बनना तय है। मंच नीचा होने के कारण विशालतम पांडाल में श्रद्धरलू बैठकर कथा नहीं सुन सकते हैं जिसके कारण वह खड़े हो जाते हैं और दम घुटने जैसा माहौल बन जाता है। क्योंकि कुछ लोग असहाय पहुंचते हैं वह खड़े नहीं हो सकते ऐसे लोग वहां मौत का शिकार भी हो सकते हैं।

आयोजकों ने श्रद्धालुओं को किया जलील
पूरे देश एवं दूर-दूर से विशालतम पंडाल में पहुंचे भावपूर्ण श्रद्धालुओं को आयोजकों ने अपनी कमी को छुपाते हुए उन्हें जलील करने का भरपूर प्रयास किया। श्रद्धालुओं को पुलिस एवं सेवादारों की सहायता लेकर पांडाल से न सिर्फ गंदे शब्द बोल कर निकाला गया बल्कि भूखे प्यासे श्रद्धालुओं के साथ अभद्र व्यवहार भी किया गया। इन श्रद्धालुओं के सामने अचानक बड़ा संकट आ गया वह मेट्रो से अपने घर की ओर जब निकलने का प्रयास कर रहे थे भारी भीड़ को देखते हुए मेट्रो का संचालन बंद कर दिया गया था। मौके पर बस आदि पकड़ने के लिए कोई साधन नहीं होने पर श्रद्धालुओं को कई किलोमीटर तक पैदल चलकर वाहन पकड़ना पड़।। दूरदराज से आए लोग न तो पंडाल में बैठ सकते थे और नाही मेट्रो का संचालन हो रहा था। असहाय श्रद्धालुओं के सामने सिर्फ धूप में रुकने के अलावा पेड़ के सहारे घंटों मेट्रो के संचालन की उम्मीद ही बची हुई थी।

आयोजक मंडल में हो चुका है विवाद
आयोजन मंडल में सबसे पहले नरेश ठाकुर की टीम इस समारोह के आयोजन के लिए प्रतिबंध थी इसके बाद किन्ही कारणों के चलते पूरे आयोजन की कमान शैलेंद्र शर्मा ने अपने हाथों में ली और अब इस आयोजन को विवादित बना दिया गया है। इतने कम समय में न तो कोई परमिशन मिल सकती है नाहीं कोई व्यवस्था की जा सकती है जिसके कारण वहां भोजन प्रसाद, लोगों के ठहरने का प्रबंध, शौचालय अथवा बाथरूम निर्माण बिजली पानी किसी भी तरह की वहां कोई व्यवस्था नहीं है जिसके कारण बाहर से पहुंचे श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसका सीधा सीधा प्रभाव श्रद्धालुओं और आचार्यश्री की निजी व्यक्तित्व पर पड़ता है।